शुक्रवार, 2 जनवरी 2009

चलो नये साल में प्रवेश करें


हमें हर वक्त कुछ नया चाहियें
तो नया साल क्या बुरा है
हम सब ही नये साल की ओर लपकेंगें और
निचोड लेंगें उसका नयापन भी
भर देंगें उसमें वो ही उदासी, पीडा और वो
तमाम खामियाँ जो हमनें बीते बरस कमाई थी
हम पूरी तरह से तैयार बैठे हैं
पुराने साल को इतिहास के सूखे खोल में बिठानें के लिये
पर क्या हम असानी से भूला पायेंगें
उन तारीखों को जब हम फुट फुट कर रोये थे
और कोई हमारे पास नहीं था
हम खुशियाँ बाँटना चाहते थे
पर हमारी खुशियाँ केवल हम ही से बातें करते करते
बेहद अकेली पड गयी थी
इस दुनियादारी के फैलते बाजार में हम
अपने को और कितना खर्च कर पायेंगें
न जाने आने वाले नये साल में हम
कितने दोस्तो को दुश्मनों में तबदील हुआ देखेगें
तमाम आशा भरे विश्वास के साथ इस साल भी
कुछ चीजों के बदलने के आसार कम हैं
मसलन नेताओं के आचरण इस साल भी नहीं बदलेगें
कई नये हैरतअंगेज घोटालों की पोल खुलेंगी
इस नये साल में हम
ऐक बरस और पुरानें पड जायेगें
और अपने आप को सुधारनें के
प्रयास में हम इस कई बार करेगें
हो न हो यह साल उनका होगा
जो इस कोने से उस कोने को
हरा भरा बनाने में लगे हैं
यकिनन उनका ही होगा यह नया साल
जो हर चेहरे को नया रंग देने में जुटे हैं
चलों इक बार फिर
कामनाओं की भारी पोटली लादे
नये साल की ओर रुख करें।

5 टिप्‍पणियां:

विवेक सिंह ने कहा…

सुन्दर विचार !

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

हओ भइया कलई कामनाओ की गठरी लेकर नए साल में प्रवेश कर लिया है जी . आपको भी बधाई .

richa ने कहा…

bhut achhe vichar...hamae har bitae varsh se sabk le kar naye varsh ko bhatar banane ka paryas karna chahiyae........

meenu ने कहा…

aapki ye panktiyan"kitane hi doston......" mere maan ko chui..mujhe lagta haike is swarthi jahan me kuch chuninda hi log hotae hai jo umar bhar saath nibate hain....islye soch samjh kar dost baane chahiye.

निखिल आनन्द गिरि ने कहा…

ढूंढ लिया आपका ब्लॉग भी...बढिया लिखती हैं आप...अपने ब्लॉग पर हिंदयुग्म का लिंक क्यूं नहीं लगाया...."बैठक" पर भी आयें..कुछ लेख भी भेजे...

निखिल